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Tuesday, December 7, 2010

देश मेरे देश मेरे

आजादी की सौंधी खुशबू,
जब नथुनों में भर आती है,
सर उठाकर जीने की,
तब आदत सी हो जाती है|
संघर्ष किया था जब सबने,
वो साल पुराना लगता है,
खून बहाया था जिसने,
वो भाई बेगाना लगता है|
बापू की तस्वीर पर,
बस फूल चड़ाए जाते हैं,
१०% कमीशन पर,
सब काम कराये जाते हैं|
आजादी बोले कुछ, तू सुन,
६३ साल की हो गयी हूँ में,
अब मुझमें वैसी बात नहीं,
मेरे बूढ़े कन्धों में अब,
पहले जैसी जान नहीं|
मेरे बच्चों अब तुम पर है,
की देश का आगे क्या कुछ हो,
अपने सपने तुम खुद देखो,
तुम खुद ही उन्हें साकार करो|
हे माँ तू ऐसा क्यों बोले,
तूने तो बहुत कुछ है दिया,
हिम्मत, सोच और इज्जत का,
जीवन में हमारे प्रकाश किया|
महनत करेंगे सब मिलकर,
देश को आगे ले जायेंगे,
ज़रुरत पड़ी तो फिर एक बार,
हम अपना लहू बहाएंगे|
देश मेरे देश मेरे,
तू ही मेरा तीर्थ है,
तू ही मेरे चारों धाम,
मैं जी लूँगा फिर और कभी,
इस बार करी जां तेरे नाम|